Monday, August 27, 2012

मुझ पर लगे सभी आरोप तथ्यों से परे व गलत हैं-PM

नई दिल्ली। कोयला घोटाले पर सोमवार को विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा में प्रधानमंत्री ने कैग रिपोर्ट पर विपक्ष को जवाब दिया। इसके बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि हजारों सवालों व आरोपों से अच्छा है मेरा सदन में खामोश रहना। उन्होंने कहा कि विपक्ष हर बार शोर मचाकर सदन की कार्यवाही बाधित करता रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष सदन को चलाने में उनकी मदद करेगा और उस मुद्दे पर बहस व जवाब देने देगा।    
 पीएम ने कोयला मंत्रालय संभालते हुए मंत्रालय के फैसलों की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि मुझ पर लगे सभी आरोप तथ्यों से परे और गलत है। कोल ब्लॉक आवंटन पर आई सीएजी की रिपोर्ट को भी पीएम ने विवादास्पद करार दिया। 'बयान नहीं इस्तीफा दो' के नारे लगाते बीजेपी के सदस्य सदन में लगातार बाधा उत्पन्न करते दिखाई दिए। इस वक्त लोकसभा को 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। इससे पहले, लोकसभा और राज्यसभा दोनों को भारी शोरगुल के बीच दोपहार 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया था।
दरअसल, वह मंगलवार को ईरान के दौरे पर जा रहे हैं इसलिए जाने से पहले वह इस मामले पर अपनी सफाई देना चाहते हैं। प्रधानमंत्री 2005-2009 में कोयला ब्लॉक आवंटन के दौरान कोयला मंत्री भी थे और इसीलिए विपक्ष उन्हें निशाना बना रहा है। वह पिछले हफ्ते से बयान देने की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन विपक्ष, खासकर बीजेपी द्वारा संसद में गतिरोध पैदा किए जाने के कारण वह ऐसा नहीं कर पाए। सूत्रों ने बताया कि वह यह कहकर कैग रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों का खंडन कर सकते हैं कि 1.86 लाख करोड़ के नुकसान के 'भ्रामक' आकलन में 'खामियां' हैं। उन्होंने कैग रिपोर्ट और विपक्ष द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि इन आरोपों का कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय द्वारा लिए गए फैसलों के लिए वह अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं।
वहीं दूसरी तरफ संसद की कार्यवाही न चलने देने को लेकर एनडीए में फूट पड़ गई है। अकाली दल के सुखदेव सिंह ढींढसा ने कहा है कि सदन में इस पूरे मसले पर चर्चा की जानी चाहिए। ढींढसा के बयान के बाद सुबह 10 बजे होने जा रही एनडीए की बैठक टल गई है, लेकिन लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में बीजेपी के नेताओं की बैठक हुई। इसमें राजनाथ सिंह, मुरली मनोहर जोशी, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज मौजूद रहे। बीजेपी के लिए राहत की बात यह है कि प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग पर शिवसेना उसके साथ है। अकाली दल की राय सार्वजनिक रूप से आने के बाद भी बीजेपी ने साफ कर दिया है कि उसे प्रधानमंत्री के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।

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