Saturday, August 4, 2012

अन्नान के इस्तीफे के बाद आरोप-प्रत्यारोप शुरू

वाशिंगटन। कोफी अन्नान के सीरिया के अंतरराष्ट्रीय शांति दूत के पद से इस्तीफा देने के बाद वैश्विक शक्तियां परस्पर आरोप-प्रत्यारोप में लग गईं हैं। अन्नान ने गुरुवार को जिनेवा में यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि सीरिया में खून-खराबा खत्म करने की उनकी पहल को जो समर्थन मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। अन्नान के इस्तीफे ने सुरक्षा परिषद के पांच सदस्यांे के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू कर दिया है। अमेरिका ने सीरिया संघर्ष पर तीन संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों को वीटो करने के लिए रूस और चीन को जिम्मेदार ठहराया है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जे कार्नी ने कहा, ‘अन्नान के इस्तीफे से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ प्रस्तावों को समर्थन करने में रूस और चीन की विफलता को उजागर किया है।’ जर्मनी ने भी कहा है कि अन्नान के फैसले की वजह प्रतिबंधों का चीन और रूस द्वारा विरोध है। लेकिन, संरा में रूस के दूत वी चर्किन ने कहा कि उनके देश ने अन्नान का काफी समर्थन किया। रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने भी अन्नान के इस्तीफे को शर्मनाक करार दिया है। ईरान ने इस्तीफे के लिए सीरिया में हस्तक्षेप करने वाले देशों को जिम्मेदार बताया है।
संयुक्त राष्ट्र। सऊदी अरब की ओर से सीरिया पर तैयार किए गए प्रस्ताव में से सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद को सत्ता से हटाने और सीरिया के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की मांगों को हटा दिया गया है। इन मांगों पर भारत समेत महासभा के कई सदस्य देशों ने आपत्ति जताई थी। इस प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान होना है। इस प्रस्ताव में सीरिया में सत्ता परिवर्तन के साथ-साथ सीरियाई सेना से बमबारी और हवाई हमले रोकने के लिए कहा गया है। गौरतलब है कि यदि इस प्रस्ताव को 193 सदस्यीय महासभा में पास कर दिया जाता है तो भी यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होने वाला।

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