Wednesday, March 28, 2012

              ' खतरे मे है देश की सुरक्षा सेना प्रमुख'      
नई दिल्ली. सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने देश की सुरक्षा को खतरे में बताया है। उन्होंने इस बाबत प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को गोपनीय चिट्ठी लिखी है। पत्र में कहा गया है कि सेना के टैंक का गोला-बारूद खत्म हो चुका है। हवाई सुरक्षा के उपकरण अपनी ताकत खो चुके हैं। इतना ही नहीं पैदल सेना के पास हथियारों तक की कमी है।
31 मई को रिटायर होने जा रहे सेना प्रमुख जनरल सिंह उम्र विवाद के बाद 14 करोड़ रुपए की रिश्वत की पेशकश मामले से विवादों में हैं। जनरल सिंह ने सेना की खस्ता हालत के बारे में 12 मार्च को प्रधानमंत्री को पांच पन्ने की चिट्ठी लिखी। चिट्ठी मंगलवार को सामने आई है। सिंह ने पत्र में लिखा, ‘हमारे सभी प्रयासों और रक्षा मंत्रालय के निर्देशों के बावजूद तैयारियां नहीं दिख रही है। मैं यह सूचित करने को विवश हूं कि सेना की मौजूदा हालत संतोषजनक से कोसों दूर है। ‘खोखलेपन’ की स्थिति से बहुत ज्यादा स्पष्ट अंतर नहीं दिख रहा। दो विरोधी पड़ोसियों से देश की सुरक्षा सेना की क्षमताओं से जुड़ी है। इस वजह से सेना की खामियों को तत्काल प्रभाव से दूर करने की जरूरत है। देश के प्रमुख हथियारों की हालत भयावह है। इनमें मैकेनाइज्ड फोर्सेस, तोपखाने, हवाई सुरक्षा, पैदल सेना और विशेष फोर्सेस के साथ ही इंजीनियर्स और सिग्नल्स शामिल हैं।’ चिट्ठी में और भी कुछ मुद्दों को उठाया है, आईटीबीपी के संचालन का अधिकार सेना को चाहिए। सेना में हवाई बेड़े की जरूरतों को पूरा किया जाए। चीन उत्तरी सीमा पर बड़ी तेजी से विकास कार्य कर रहा है। ऐसे में राज्यों से सिंगल विंडो क्लीयरेंस के तहत बुनियादी विकास की अनुमति दिलवाई जाए। जनरल सिंह के खत के मुताबिक सेना के पास हथियार और साज-ओ-सामान समेत कई चीजों की कमी है। सेना के सामने मौजूद चुनौतियां: 
-दुश्मन को शिकस्त देने के लिए टैंक के बेड़े के पास गोला-बारूद खत्म होने के कगार पर।
-तोपखाने में फ्यूज नहीं, अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर में खरीदी व कानूनी प्रक्रिया का अडंग़ा।
-हवाई सुरक्षा के 97 फीसदी उपकरण बेकार, हवाई हमले से बचाने का भरोसा नहीं।
-पैदल सेना के पास पर्याप्त हथियारों का अभाव, रात में लडऩे की क्षमता भी नहीं रही।
-विशेष फोर्सेस के पास जरूरी हथियार नहीं, युद्ध में काम आने वाले पैराशूट्स भी खत्म हुए।
-सेना की निगरानी में बड़े स्तर पर खामियां, यूएवी और निगरानी के लिए जरूरी रडार नहीं।
-एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल्स की मौजूदा उत्पादन क्षमता और उपलब्धता बेहद कम।
-लंबी दूरी तक मार करने वाले तोपखाने में वेक्टर्स (पिनाका व स्मर्च रॉकेट सिस्टम) का अभाव। 


Tuesday, March 27, 2012


टीम अन्ना को अपराधी की तरह पेश किया जाए मुलायम
नई दिल्ली. समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने टीम अन्ना पर हमला करते हुए मंगलवार को लोकसभा में कहा कि जिन लोगों ने संसद का अपमान किया है, उन्हें मुलजिम की तरह सदन में लाया जाए और उनसे पूछा जाए।
 वहीं, जेडी (यू) के नेता शरद यादव ने मंगलवार को लोकसभा में कहा, 'मैं 40 साल से किसानों, मजदूरों और बेरोजगारों की लड़ाई लड़ रहा हूं।' उन्होंने अन्ना हजारे की तरफ इशारा करते हुए कहा, 'मैं किसी फकीर से कम नहीं हूं।' संसद में बैठे नेताओं के लिए अपमानजनक टिप्पणियों पर बोलते हुए यादव ने कहा, 'जिस तरह का समाज होगा, वैसे ही नेता संसद में आएंगे। आप समाज को बदलिए। सांसद आसमान से संसद में नहीं आते हैं।' यादव ने कहा, 'संसद चुनाव आयोग की तरह एक संस्था है। इस पर हमला नहीं होना चाहिए। इसका सम्मान बरकरार रहना चाहिए। यह जिम्मेदारी लोकसभा अध्यक्ष आपकी है।' शरद यादव ने टीम अन्ना के खिलाफ प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में मंगलवार की सुबह नोटिस दिया था।नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूख अब्दुल्लाह ने टीम अन्ना के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यदि मुझ पर एक रुपए का भी भ्रष्टाचार साबित हो जाता है तो मैं न सिर्फ संसद को छोड़ दूंगा बल्कि राजनीति ही छोड़ दूंगा। टीम अन्ना के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए डीएमके के सांसद टीकेएस एलनगोवन ने कहा कि लोगों की भीड़ देखकर जोकर का नाटक बढ़ जाता है। टीम अन्ना भी ऐसा ही कर रही है। मैं मुलायम सिंह यादव जी की राय से सहमत हूं, टीम अन्ना को मुलजिम बनाकर सदन में पेश कराया जाए। राष्ट्रीय जनता दल के रघुवंश प्रसाद सिंह ने संसद सदस्यों के टीम अन्ना के मंच पर जाने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हमारे बीच भी लोग हैं जो राजनीतिक फायदा उठाने के लिए फुदक कर  जंतर-मंतर पहुंच जाते हैं। एक बार नहीं दो-तीन बार चले जाते हैं। संसद देश की जनता और लोकतंत्र का प्रतीक है इसे कोई हिला नहीं सकता, कोई जरा सा बोल दिया तो उसे बेवजह इतना तूल दिया जा रहा है। हम लोगों को जनता के कामों और समस्याओं पर लगा रहना चाहिए, सिरफिरे लोगों की बातों को इतना तूल नहीं देना चाहिए।वहीं शिवसेना के सांसद आनंद राव अंसुल ने कहा कि अन्ना की मानसिकता यह हो गई है कि वो खुद को संसद से भी बड़ा बता रहे हैं। अब वो सदन का घोर अपमान करने का भी काम कर रहे हैं। अन्ना और उसके साथियों को सदन में बुलवाकर माफी मंगवाई जानी चाहिए।बहस के अंत में लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि सांसदों का चुनाव देश की जनता अपनी बुद्धि से करती है। सदन की महिमा के खिलाफ कही गई कोई भी बात बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इससे पहले मंगलवार को कांग्रेस ने भी टीम अन्ना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। कांग्रेस के सांसद जगदंबिका पाल ने टीम अन्ना के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया। जबकि इसी पार्टी के सांसद वीरभद्र सिंह ने अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर उनके खिलाफ अवमानना का मुकदमा दायर करने की चेतावनी दी है। देवास लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के ही एक अन्य सांसद सज्जन सिंह वर्मा ने 17 मार्च को सांसदों को 'बलात्कारी, हत्यारे और लुटेरे' कहने पर टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन को नोटिस दिया था। लेकिन केजरीवाल ने अब तक इस नोटिस का जवाब नहीं दिया है। राष्ट्रीय जनता दल के सांसद राजनीति प्रसाद ने भी टीम अन्ना पर हमला बोला है। 31 दिसंबर, 2011 को राज्यसभा में लोकपाल ड्राफ्ट बिल को फाड़ने वाले प्रसाद ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि टीम अन्ना के सदस्यों को सांसदों के खिलाफ टिप्पणी करने के लिए जेल में भेज देना चाहिए। गौरतलब है कि सोमवार को टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने पूछा था कि जब संसद में बिल फाड़े जाते हैं तो क्या संसद का अपमान नहीं होता है? उन्होंने कहा था कि अन्य सांसद बिल फाड़े जाने से सदस्यों को रोकते क्यों नहीं हैं। बीते रविवार को दिल्ली में अन्ना हजारे के एक दिन के अनशन के दौरान मनीष सिसोदिया ने शरद यादव के खिलाफ उनका वीडियो दिखाते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिस पर सोमवार को संसद में जमकर हंगामा हुआ था। संसद में विभिन्न पार्टियों के टीम अन्ना के खिलाफ लामबंद होने पर टीम अन्ना ने भी अपना रुख कड़ा करने का संकेत दिया है। टीम के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को ट्वीट करते हुए कहा है, 'आज अच्छे सांसद आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 162 सांसदों का समर्थन करेंगे या फिर वे संसद को साफ करने की मांग करेंगे? पूरा देश आज यही देखेगा।'  मंगलवार को लोकसभा में अलग तेलंगाना राज्य की मांग और प्रमुख जनरल वीके सिंह को घूस की पेशकश के आरोप के मुद्दे पर शोरशराबा हुआ। तेलूगुदेशम पार्टी के सांसदों ने तेलंगाना के मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए प्रश्नकाल स्थगित करने के लिए नोटिस दिया था। वहीं, बीजेपी ने सेनाध्यक्ष के आरोप की जांच की मांग करते हुए लोकसभा और राज्यसभा में हंगामा किया। पार्टी ने प्रश्नकाल स्थगित कर इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की।


रक्षा मंत्री ने माना पूर्व आर्मी चीफ ने की थी रिश्फत की पेशकश
नई दिल्‍ली. रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने भी माना है कि ले. जन. के पद से रिटायर होने वाले तेजिंदर सिंह ने आर्मी चीफ जनरल वी के सिंह के सामने घूस की पेशकश की थी। एंटनी ने कहा, ‘करीब साल भर पहले जनरल वीके सिंह ने बताया‍ कि तेजिंदर सिंह ने उन्‍हें रिश्‍वत की पेशकश की है। मैं भी इसे सुनकर आश्‍चर्यचकित रह गया। मैंने उन्‍हें इस मामले में कार्रवाई के लिए कहा। लेकिन उन्‍होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि तेजिंदर के खिलाफ कार्रवाई हो। मुझे अभी तक आर्मी चीफ की तरफ से कोई लिखित शिकायत नहीं मिली।’  रिश्‍वत की पेशकश के आर्मी चीफ के दावे पर राज्‍यसभा में आज बयान देते हुए एंटनी ने कहा कि 'मैं सेना के आधुनिकीकरण के पक्ष में हूं लेकिन  भ्रष्‍टाचार बर्दाश्‍त नहीं किया जाएगा। भ्रष्‍टाचारी चाहे कितना भी ताकतवर हो, उसे बख्‍शा नहीं जाएगा। यदि मैं गलत हूं तो मुझे दंड दिया जाए लेकिन मैंने अपना कर्तव्‍य सही तरीके से निभाया है। अब मामले की जांच सीबीआई करेगी।' हालांकि विपक्ष एंटनी के जवाब से संतुष्‍ट नहीं दिखा। बीजेपी नेता अरुण जेटली ने कहा कि सरकार को ‘प्रो एक्टिव’ कदम उठाने चाहिए थे और इस तरह के हालात से बचना चाहिए था। सदन से बाहर निकलते ही पत्रकारों ने एंटनी को घेर लिया और सवालों की बौछार कर दी। हालांकि रक्षा मंत्री ज्‍यादा कुछ नहीं बोले और कहा‍ कि उन्‍होंने सदन में सबकुछ कह दिया है। रक्षा मंत्री ने भले ही सबकुछ कह दिया लेकिन एंटनी के बयान के बाद अब आर्मी चीफ को कई मुश्किल सवालों के जवाब देने पड़ सकते हैं। इस बीच, एंटनी द्वारा संसद में अपना नाम लिए जाने के बाद तेंजिंदर ने जनरल सिंह पर निशाना साधा। उन्‍होंने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि उनके खिलाफ आरोप लगाने वालों को सबूत पेश करना चाहिए। तेंजिदर ने माना कि वह अगस्‍त 2010 में जनरल वी के सिंह से आखिरी बार मिले थे। लेकिन यह मीटिंग ‘रीइम्‍प्‍लॉयमेंट’ के मसले पर थी। जनरल सिंह ने रीइम्‍प्‍लॉयमेंट के लिए उनके नाम की सिफारिश की थी। ले. जन. (रिटायर्ड) तेजिंदर सिंह ने किसी कंपनी के लिए बिचौलिये का काम करने से साफ इनकार किया। उन्‍होंने कहा, ‘मैंने जनरल सिंह के सामने रिश्‍वत लेने के लिए पेशकश नहीं की। मैंने कभी किसी को घूस लेने के लिए नहीं कहा। मैंने टैट्रा या हथियार बनाने वाली किसी भी कंपनी के लिए काम नहीं किया है। किसी कंपनी के लिए काम करने का सवाल ही नहीं उठता है। इतनी बड़ी (14 करोड़ रुपये की) पेशकश करने के लिए जनरल के साथ दोस्‍ताना रिश्‍ते होने चाहिए। मैं जनरल का दोस्‍त नहीं हूं। मेरे उनके साथ प्रोफेशनल रिश्‍ते रहे हैं। मैंने जनरल सिंह के खिलाफ मानहानि का केस चलाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया  है।’‘मुद्दा करप्‍शन का है तो रक्षा मंत्री को खुद ही कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्‍हें आर्मी चीफ को फोन कर कहना चाहिए था कि इस बारे में आप लिखकर दीजिए।’ एंटनी के आज के बयान से कई सवाल उठते हैं। पहला सवाल यह कि आखिर जनरल सिंह घूस की पेशकश करने वाले अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई क्‍यों नहीं करना चाहते थे? इसके अलावा यदि रक्षा मंत्री को इस मामले की जानकारी (भले ही मौखिक) मिली, तो उन्‍होंने अपने स्‍तर पर (स्‍वत: संज्ञान लेते हुए) कोई कार्रवाई क्‍यों नहीं की। इतनी गंभीर बात रक्षा मंत्री की जानकारी में आने के बाद भी तेजिंदर सिंह ने बतौर अफसर नौकरी की और सेवा शर्तों के मुताबिक ही रिटायर हुए, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्‍यों नहीं की गई या फिर इस तरह के मामलों की जांच नहीं की गई? जनरल वी के सिंह डेढ़ साल तक चुप क्‍यों बैठे रहे? मंत्री के कहने पर लिखित शिकायत क्‍यों नहीं की?



 टीम अन्ना के खिलाफ संसद मे होगी आरक – पार की जंग
नई दिल्ली. टीम अन्ना और संसद में टकराव की स्थिति बनती जा रही है। आज लोकसभा में शाम चार बजे टीम अन्ना के खिलाफ प्रस्ताव लाए जाने पर चर्चा हो सकती है। जनता दल (यू) के नेता शरद यादव ने टीम अन्ना के खिलाफ प्रस्ताव लाने के लिए लोकसभा में नोटिस दिया है। बीते रविवार को दिल्ली में अन्ना हजारे के एक दिन के अनशन के दौरान मनीष सिसोदिया ने शरद यादव के खिलाफ उनका वीडियो दिखाते हुए आपत्तिजनक टिप्पणीकी थी, जिस पर सोमवार को संसद में जमकर हंगामा हुआ था। संसद में विभिन्न पार्टियों के टीम अन्ना के खिलाफ लामबंद होने पर टीम अन्ना ने भी अपना रुख कड़ा करने का संकेत दिया है। टीम के प्रमुख सदस्य अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को ट्वीट करते हुए कहा है, 'आज अच्छे सांसद आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 162 सांसदों का समर्थन करेंगे या फिर वे संसद को साफ करने की मांग करेंगे? पूरा देश आज यही देखेगा।'  दूसरी तरफ, संसद के विशेषाधिकार हनन के एक मामले में अरविंद केजरीवाल की मुश्किल खत्म नहीं हो रही है। सांसदों को 'बलात्कारी, हत्यारे और लुटेरे' कहने पर टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने मियाद पूरी होने के बावजूद अब तक लोकसभा सचिवालय की ओर से दिए गए विशेषाधिकार हनन नोटिस का जवाब नहीं दिया है। सांसद सज्जन वर्मा की पहल पर लोकसभा सचिवालय उन्हें दो दिन के अंदर नोटिस का जवाब देने संबंधी रिमाइंडर भेजने की तैयारी में है। केजरीवाल को 24 मार्च तक विशेषाधिकार हनन नोटिस का जवाब देना था। 17 मार्च को लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने मध्य प्रदेश के देवास से कांग्रेस सांसद सज्जन वर्मा के पत्र के आधार पर केजरीवाल को नोटिस जारी किया था।   मंगलवार को हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही दोपहर दो बजे बजे तक के लिए टाल दी गई। सदन में अलग तेलंगाना राज्य की मांग और प्रमुख जनरल वीके सिंह को घूस की पेशकश के आरोप के मुद्दे पर शोरशराबा हुआ। तेलूगुदेशम पार्टी के सांसदों ने तेलंगाना के मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए प्रश्नकाल स्थगित करने के लिए नोटिस दिया था। वहीं, बीजेपी ने सेनाध्यक्ष के आरोप की जांच की मांग करते हुए लोकसभा और राज्यसभा में हंगामा किया। पार्टी ने प्रश्नकाल स्थगित कर इस मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की। 

अगले तीन महीने मे होगी 'नौकरियो की बरसात'
नई दिल्ली. अगले तीन महीने नौकरी की ख्वाहिश रखने वालों के लिए शानदार अवसर मुहैया करा सकते हैं क्योंकि 39 फीसदी भारतीय नियोक्ताओं के अपने कर्मचारियों में संख्या में बढ़ोतरी (हेडकाउंट) करने के आसार हैं। एक सर्वे में यह जानकारी दी गई है।   रिक्रूटमेंट टेंडरिंग प्लेटफॉर्म माईहायरिंगरक्लबडॉटकॉम द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार, देश का नेट इंप्लायमेंट आउटलुक (रिक्रूटमेंट रुझानों का एक मापक) 39 फीसदी के बेहतरीन स्तर पर रहा जो आगामी तिमाही के दौरान नौकरी चाहने वालों के लिए ठोस अवसरों को परिलक्षित करता है। माईहायरिंगरक्लबडॉटकॉम के सीईओ राजेश कुमार ने कहा कि नौकरी चाहने वालों को ज्यादा अवसर मिलने जा रहे हैं क्योंकि हमारे स्टडी से यह प्रदर्शित होता है कि भारत का इंप्लायमेंट मार्केट चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही की तुलना में सकारात्मक हायरिंग गतिविधियों का अनुभव करेगा। उन्होंने कहा कि अच्छी बात यह है कि कई बाजार सही दिशा में बढ़ते प्रतीत हो रहे हैं। सर्वे में कहा गया कि तिमाही दर तिमाही के आधार पर आउटलुक में 8 फीसदी अंकों की बढ़ोतरी हुई है जबकि साल दर साल के आधार पर इसमें 6 फीसदी की बेहतरी आई है। क्षेत्रवार तरीके से देखा जाए तो सभी चार क्षेत्रों में नियोक्ता वित्त वर्ष 2012-2013 की पहली तिमाही के दौरान एक मजबूत इंप्लायमेंट मार्केट की भविष्यवाणी कर रहे हैं। इसमें दक्षिण क्षेत्र सबसे सकारात्मक रहा है जहां नेट इंप्लायमेंट आउटलुक 30 फीसदी रहा। इसके बाद उत्तरी क्षेत्र (26 फीसदी), पश्चिमी क्षेत्र (23 फीसदी) तथा पूर्वी क्षेत्र (21 फीसदी) के स्थान रहे।  स्टडी में कहा गया कि हायरिंग रुझान सभी चार क्षेत्रों में साल दर साल तथा तिमाही दर तिमाही के आधार पर मजबूत रहे। सेक्टर के आधार पर की गई तुलना से पता लगा कि आगामी तिमाही के दौरान सभी 9 इंडस्ट्रियल सेक्टर में नियोक्ता हेडकाउंट में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। सबसे उत्साहवर्धक अनुमान आईटी तथा आईटीईएस सेक्टर के लिए व्यक्त किया गया है जहां 21 फीसदी का नेट इंप्लायमेंट आउटलुक रहा।एफएमसीजी दूसरा सबसे अधिक आशावादी सेक्टर रहा जिसका नेट इंप्लायमेंट आउटलुक 19 फीसदी का रहा। इसके बाद इंफ्रास्ट्रक्चर (18 फीसदी), रिटेल (18 फीसदी), बैंकिंग एवं फाइनेंशियल सर्विसेज (16 फीसदी), ऑटोमोबाइल एवं मैन्यूफैक्चरिंग (14 फीसदी), टेलीकॉम (11 फीसदी), रियल एस्टेट (7 फीसदी) एवं बिजनेस सर्विसेज (5 फीसदी) के स्थान रहे। कुमार ने कहा कि आईटी तथा आईटीईएस सेक्टर ने हायरिंग योजनाओं तथा गतिविधियों में बढ़त लेनी शुरू की। चालू तिमाही के दौरान भी यह सेक्टर हायरिंग गतिविधियों में सबसे अधिक स्थान पा रहा है। इसके अतिरिक्त, बैंकिंग एवं फाइनेंशियल सर्विसेज की हायरिंग गतिविधियों में भी बेहतरी आई है और उम्मीद है कि आगामी वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान भी यही रुझान बना रहेगा।

Monday, March 26, 2012


'रक्षा सौदो मे भ्रष्टाचार के वजह'
सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने उन्‍हें रिश्‍वत की पेशकश किए जाने का जो दावा किया है, वह सैन्‍य सौदों में भ्रष्‍टाचार की पोल खोलता है। रक्षा क्षेत्र में भ्रष्‍टाचार का सबसे बड़ा रास्‍ता खरीदी प्रक्रिया के जरिए ही खुलता है। सरकार कहती है कि सौदे में दलालों को शामिल नहीं किया जाएगा, दलाली नहीं दी जाएगी। फिर भी बिना कमीशन के कोई सौदा तय नहीं होता। दलाली नहीं देने के लिए सख्‍त मानदंड तय किए जाने के बावजूद यह स्थिति है। इसके कई कारण हैं। कोई भी सौदा तय होने में होने वाली देरी से भी भ्रष्‍टाचार बढ़ता है। देरी की एक वजह अफसरों की जिम्‍मेदारी से बचने की प्रवृत्ति है। अफसर यह सोच कर फूंक-फूंक कर कदम रखते हैं कि जांच होने पर उनकी गर्दन न फंसे। क्‍योंकि सौदेबाजी से गलत कमाई नेता करते हैं, लेकिन जांच होने पर गाज अफसरों पर ही गिरती है। खरीद की प्रक्रिया को नेता गलत ढंग से प्रभावित करते हैं। खरीद के लिए सेना अपनी जरूरत तय करके प्रस्‍ताव देती है। इसके बाद टेंडर निकाला जाता है। टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियों में से सही पात्र को चुना जाता है। फिर उनकी ओर से आपूर्ति की जाने वाले हथियार आदि का परीक्षण होता है। इस परीक्षण के दौरान ही अवैध सौदेबाजी होती है। अक्‍सर नेताओं की ओर से अफसरों पर दबाव देकर मानदंडों से समझौता कराया जाता है। सेना प्रमुख ने जो दावा किया है, इस मामले में कोई राजनीतिक दखलअंदाजी थी या नहीं, यह जांच का विषय है। कई बार आपात जरूरत के नाम पर भी भ्रष्‍टाचार होता है। निर्णय लेने में देरी या और वजहों से पहले से खरीद नहीं की जाती है, लेकिन तत्‍काल जरूरत पड़ने पर कई गुना ज्‍यादा दाम में खरीदारी होती है। खरीद प्रक्रिया में स्‍वतंत्र एजेंसी की निगरानी का अभाव है। सीएजी कुछ हद तक इस पर नजर रखती है, लेकिन वह सौदा होने के बाद पड़ताल करता है। प्रक्रिया के दौरान अगर कोई गड़बड़ी हो रही है तो उसे पकड़ने और रोकने का ठोस तंत्र नहीं है। खरीद में देरी और भ्रष्‍टाचार की एक वजह यह भी है कि आज लॉबीज बन गई हैं। कुछ समय पहले तक हम 80 से 85 फीसदी खरीदारी रूस से करते थे। लेकिन अब कई देशों की कंपनियां दौड़ में हैं। सबने अपने एजेंट फैला रखे हैं और उनके बीच 'कॉरपोरेट वॉर' चलता रहता है। एक एजेंट दूसरी कंपनी की डील में अड़ंगा डालने के लिए तमाम हथकंडे अपनाते हैं। नतीजा होता है खरीद प्रक्रिया पूरी होने में देरी। ऐसे में चुनौती यह भी है कि वह अपनी जरूरतों के मुताबिक निष्‍पक्ष निर्णय जल्‍दी लेने और उस पर अडिग रहने का तंत्र विकसित हो। जिम्‍मेदारी तय करने की प्रक्रिया का घोर अभाव है। कुछ समय पहले एक अहम रक्षा सौदे से जुड़ी फाइल सड़क किनारे पड़ी मिली। इसके लिए किसी की जिम्‍मेदारी तय नहीं हुई। उल्‍टे, सरकार ने दलील दी कि इससे सूचना लीक नहीं हुई। हमारी व्‍यवस्‍था में दोषियों को सजा देने का कोई सख्‍त उदाहरण नहीं है। चीन में भ्रष्‍टाचारियों को सीधे फांसी पर लटकाया जाता है। यह अलग बात है कि इससे भ्रष्‍टाचार खत्‍म नहीं हो गया, लेकिन भ्रष्‍टाचारियों में खौफ तो बना ही है। मौजूदा सेना प्रमुख ने भ्रष्‍टाचार को नहीं बर्दाश्‍त करने की नीति पर अमल किया है। इससे एक उम्‍मीद जगी है। उनके आरोपों पर रक्षा मंत्रालय ने सीबीआई जांच का ऐलान किया है, लेकिन बोफोर्स दलाली का उदाहरण हमारे सामने है। 1962 से ही देखा जाए तो सरकार ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है, जिसे सुरक्षा के लिहाज से मजबूत और इस क्षेत्र में संस्‍थागत भ्रष्‍टाचार कम करने की दिशा में सकारात्‍मक कहा जा सके। सरकार अपना दायित्‍व निभाने में हमेशा पीछे रही है। हमारी रक्षा क्षमता जितनी होनी चाहिए, उतनी कभी नहीं रही। जो भी पैसा खर्च हुआ, सही तरीके से नहीं हुआ। यह हमने कारगिल युद्ध के समय भी देखा और मुंबई हमलों के बाद भी। हमने बोट खरीद ली, लेकिन उन्‍हें चलाने के लिए ईंधन नहीं दे पाए। रक्षा क्षेत्र में प्रक्रियागत भ्रष्‍टाचार तो है ही,  पर इससे ज्‍यादा खतरनाक है संस्‍थागत भ्रष्‍टाचार। इस स्थिति के लिए जिम्‍मेदारी तय करने की बात करें तो ज्‍यादा जिम्‍मेदारी राजनीतिक नेतृत्‍व पर ही आती है। निर्णय प्रक्रिया में हावी नेता ही होते हैं। सैन्‍य नेतृत्‍व की भूमिका योजना बनाने तक सीमित है, फैसले लेने का दायित्‍व राजनीतिक नेतृत्‍व के पास ही है। नेतृत्‍व का हाल यह है कि खतरे को भांप कर उसके लिए तैयार रहने की नीति पर कभी नहीं अमल किया गया। बल्कि खतरा आने के बाद उसे किसी तरह भारत और दुनिया के शायद अब तक के सबसे बड़े रक्षा ठेके में फ्रांसीसी विमानन कंपनी दसॉ ने चार साल से अधिक समय तक चली प्रतिस्पर्धा में जीत हासिल कर ली है। दसॉ ने भारतीय वायुसेना को 52 हजार करोड़ रुपये (10.4 अरब डॉलर) में 126 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति करने का ठेका हासिल किया। भारत अपनी सेना के आधुनिकीकरण के लिए एक यूरोपीय रक्षा उत्पादन कंपनी से 500 मिसाइल खरीद रहा है। सूत्रों के अनुसार यह डील सवा अरब डॉलर की है। भारत ने हाल में एक फ्रांसीसी फर्म से वायु सेना के मिराज-2000 लड़ाकू विमानों के लिए हवा से हवा में मार करने वाली 490 मिसाइलों की खरीद के लिए 95 करोड़ यूरो के एक सौदे को मंजूरी दी है। इन मिसाइलों को 51 मिराज-2000 विमानों में तैनात किया जाएगा, जिन्हें फ्रांस के कारखानों में उन्नत बनाने पर काम चल रहा है। इन विमानों को अत्याधुनिक बनाने के लिए पहले ही 1.47 अरब यूरो के सौदे पर हस्ताक्षर किया जा चुका है। 


श्रीप्रकाश जायसवाल ने अपनी ही सरकार को कोसा
कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में सर्राफा व्यापारियों को मनाने पहुंचे केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल अपनी ही सरकार को कोसने लगे. सर्राफा व्यापारी सोने पर आयात और उत्पाद शुल्क बढ़ाए जाने से भड़के हुए हैं. आम बजट में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोने पर आयात शुल्क 2 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी करने का एलान किया है.केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा, "हमें ऐसा लगता है कि आप पर संकट ज्यादा है, सरकार पर कम. सरकार पर रेवेन्यू का संकट है...लेकिन छोटे से रेवेन्यू लेकर, दस-पांच बूंद पानी लेकर गागर नहीं भरी जा सकती. गागर तो गागर है उसके लिए अनाप-शनाप पानी चाहिए...तब गागर भरती है. केवल 100 करोड़ रेवेन्यू की प्राप्ति होगी लेकिन उसके बदले में कितना खून आपका चूसा जाएगा, इसकी कल्पना हम कर सकते हैं."जायसवाल के मुताबिक ये सब राजस्व बढ़ाने के फेर में किया गया है और वो इसके हक में नहीं हैं.मंत्री जी यहीं नहीं रुके......और अपनी ही केंद्र सरकार के कुछ विभागों की तुलना खून चूसने वाले मच्छरों से कर डाली और इशारे में नेताओं-मंत्रियों की भी खिल्ली उड़ाई.जायसवाल ने कहा, "ऐसे लोग जिनका कार्य शोषण ही करना है. जिस तरह से रात में मच्छर होते हैं वो खून चूसते हैं, उसी तरीके से हमारे देश के कुछ विभाग हैं जो खून चूसने का ही काम करते हैं. डायन का घर देखना कोई अच्छी बात नहीं है और ईश्वर न करे ऐसी कभी परिस्थितियां उत्पन्न हों कि नेताओं का सहारा आपको लेना पड़े." आपको बता दें कि श्री प्रकाश जायसवाल उत्तरप्रदेश चुनाव में प्रभारी थे लेकिन चुनावी नतीजों में पार्टी की किरकिरी से वो तिलमिलाए हुए हैं. अब देखना ये है कि मंत्री जी के बयान क्या गुल खिलाते हैं.