Friday, October 26, 2012

कृष्णा का इस्तीफा,अंबिका और मुकुल ने भी की पेशकश


केंद्र सरकार में फेरबदल की कवायद के बीच विदेश मंत्री एस एम कृष्णा ने इस्तीफा दे दिया है , इस्तीफा मंजूर भी कर लिया गया है।  अंबिका सोनी और मुकुल वासनिक ने इस्तीफे की पेशकश कर दी है। दोनों ने ही पार्टी के लिए काम करने की इच्छा जताई है। वहीं विदेश मंत्री एसएम कृष्णा आज दिन में ही इस्तीफा दे चुके हैं। कृष्णा ने अपनी सुरक्षा और लाल बत्ती की गाड़ी भी लौटा दी हैअपने इस्तीफ़े के बाद कृष्णा ने कहा कि वे पार्टी के एक वफ़ादार कार्यकर्ता हैं और पार्टी के लिए काम करते रहेंगे. पिछले कुछ दिनों से भारतीय मीडिया में कृष्णा के इस्तीफ़े की बात चल रही थी.
गुरुवार को कर्नाटक के लोकायुक्त ने मैसूर-बैंगलोर एक्सप्रेसवे के लिए ज़मीन अधिग्रहण करने के मामले में कृष्णा के ख़िलाफ़ जांच के आदेश दिए थे.इसी मामले में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के ख़िलाफ़ भी जांच के आदेश दिए गए हैं. इसी बीच आज सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने भी इस मुद्दे पर मुलाकात की। मुलाकात प्रधानमंत्री के निवास पर हुई। कैबिनेट में 28 अक्टूबर (रविवार) को फेरबदल होने की संभावना है। 
कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा या फिर कानून मंत्री सलमान खुर्शीद विदेश मंत्री बन सकते है। कृष्णा को कर्नाटक या फिर तमिलनाडु का राज्यपाल बनाया जा सकता है। एनसीपी कोटे से अगाथा संगमा का हटना तय माना जा रहा है तो पर्यटन मंत्री सुबोधकांत सहाय की कुर्सी पर भी तलवार लटकी है। वहीं राहुल गांधी के केंद्र सरकार में शामिल होने के कोई संकेत नहीं है। हालांकि राहुल के कई करीबियों को इस बार मंत्रीपद मिल सकता है। मध्य प्रदेश के मंदसौर से सांसद मीनाक्षी नटराजन और तमिलनाडु के विरुधुनगर से सांसद मनिका टैगोर भी मंत्रीमंडल में शामिल हो सकती है। रविवार को कैबिनेट में फेरबदल पक्का माना जा रहा है। एबीपी न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि तीन कांग्रेसी सांसदों को फोन पर रविवार को मंत्रीपद की शपथ लेने के बारे में बताया गया है। ये सांसद अबु हसम खान चौधरी, पी बलराम नाइक और कोटला सूर्यप्रकाश रेड्डी हैं। 

दोबारा बीजेपी अध्‍यक्ष नहीं बन पाएंगे गडकरी

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे नितिन गडकरी को लेकर बीजेपी में खींचतान शुरू हो गई है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि बीजेपी का एक बड़ा धड़ा गडकरी को दोबारा अध्यक्ष बनाए जाने के पक्ष में नहीं है.हालांकि राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ (आरएसएस) नितिन गडकरी को दोबारा बीजेपी के अध्यक्ष के तौर पर मौका देने के पक्ष में है.सूत्रों के हवाले से जो खबर मिल रही है उसके मुताबिक यह कहा जा रहा है कि बीजेपी के बड़े नेता लालकृष्ण आडवाणी, लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज, राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली के साथ-साथ बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और वाराणसी से सांसद मुरली मनोहर गड़करी को दोबारा मौका दिए जाने के पक्ष में नहीं हैं.लेकिन संघ इस बात का दबाव बना रहा है कि गडकरी को दोबारा बीजेपी अध्यक्ष की कुर्सी मिल जाए.संघ के प्रचार प्रमुख दशहरे के दिन कह चुके हैं गडकरी का मीडिया ट्रायल हो रहा है. हालांकि संघ ने गडकरी को उनकी कंपनी के गड़बड़झाले पर 30 अक्टूबर तक सफाई देने को कहा है.भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे नितिन गडकरी क्या दोबारा बीजेपी के अध्यक्ष बन पाएंगे ये सवाल अभी बना हुआ है.  इस बीच गडकरी को लेकर नया खुलासा हुआ है.इसके बाद अब आयकर विभाग भी गडकरी की कंपनी की जांच करेगा. यही नहीं प्रवर्तन निदेशालय भी इसकी जांच कर सकता है.
इसी तरह एक दूसरी कंपनी को भी गडकरी के पूर्ति ग्रुप ने एक हाथ से पैसा दिया और दूसरे हाथ से ले लिया.
पूर्ति ग्रुप ने रिजेंसी इक्विफिन नाम की कंपनी को 2008-09 में 26 लाख का अनसिक्योर्ड लोन दिया, जिसमें से रिजेंसी इक्विफिन ने अगले साल 10 लाख रुपये लौटा दिए. लेकिन गडकरी की घाटे में चल रही कंपनी पूर्ति ने 2011 में रिजेंसी इक्विफिन को 95 लाख रुपये दे दिए.पूर्ति ग्रुप में आईडियल रोड बिल्डर्स का निवेश पहले ही विवादों में है. इससे पहले 'टाइम्स ऑफ इंडिया' ये खुलासा कर चुका है कि कैसे गडकरी के ड्राइवर और ज्योतिषी बन गए डायरेक्टर. गडकरी की कंपनी पूर्ति ग्रुप में करीब 100 कंपनियों का निवेश हो सकता है. अखबार के मुताबिक गडकरी की कंपनी में निवेश करने वाली पांच कंपनियों का पता दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका का दिया गया है.
जिस घर का पता दिया गया है उस घर के मालिक बलवान सिंह टोकस हैं. बलवान सिंह के घर के पते पर रजिस्टर्ड कंपनियां हैं:  किंग बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड,  न्यू एज इन्फ्रावेल प्राइवेट लिमिटेड, निर्माण इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड, एडवेंट आईटी सॉल्यूशंस और फास्ट बिल्डवेल प्राइवेट लिमिटेड.दिलचस्प बात ये है कि रिजेंसी इक्विफिन के पास पूर्ति ग्रुप के 43 लाख शेयर हैं. मुमकिन है कि इस कंपनी ने गडकरी के पैसों से ही ये शेयर खरीदे हों.बलवान सिंह का कहना है कि पिछले तीन साल से उनके घर आयकर विभाग से चिट्ठी आती है.  तीन साल से टोकस का परिवार आयकर विभाग की चिट्ठियों को नजरअंदाज करता रहा है, लेकिन अब टीवी पर गडकरी की कंपनी में निवेश करने वाली कंपनियों के फर्जी पते की खबर देखकर बलवान सिंह टोकस ने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज करवाई है.

Tuesday, October 23, 2012

DUJ WELCOMES RELEASE OF SYED KAZMI


The DUJ welcomes the Supreme Court’s granting of bail to journalist Syed Mohammad Ahmad Kazmi, after seven months in prison. Kazmi, a 50-year-old scribe, was working for an Iranian news agency in Delhi and also for the state-run Doordarshan, He is accused of providing information leading to an attack on an Israeli diplomat. He has denied the charges against him.In the last three days the DUJ office bearers and members including Sujata Madhok, S.K. Pande, Jal Khambata, Iftikhar Gilani, Javed Naqvi, John  Cherian, Seema Mustafa met Kazmi's family at their home and felicitated them. General Secretary S.K. Pande and some journalists also went to Tihar Jail to witness Kazmi’s late evening release and congratulate him. A few hundred people from Kazmi’s village, community, neighbourhood and extended family were present at the jail to receive him. Kazmi was driven home in a huge motorcade.Members of the Jamia Teachers Solidarity Group were also present at the jail to witness the release.Subsequently DUJ members and the Jamia Teachers Solidarity Group led by Manisha Sethi as well as veteran journalists including Syed Naqvi, as well as IWPC General Secretary T.K. Rajalakshmi, the Kazmi family and their lawyer Mehmood Pracha met at the Press Club of India to discuss the Kazmi case, its coverage by the media and the legal implications for press freedom and human rights issues.While hailing the Supreme Court verdict the DUJ has decided to work jointly with secular groups and individuals on common issues of solidarity with Kazmi. DUJ called for a wide united front to look into all aspects of the Kazmi case and its ramifications for journalists at large. They also called upon the media to ensure that all sides of the case are reported in public interest.The DUJ believes that journalists have to maintain all sorts of contacts and sources for their stories. Such connections for professional purposes should not be misconstrued as active collusion or connivance in dubious activities including crime. The DUJ fears that Kazmi may have been unwittingly caught up in an inter-country political and diplomatic crisis of this nature. DUJ follows the Constitutional and legal principle that a person must be treated as innocent until and unless convicted as guilty. We advise our members, particularly those on the crime and legal beats, to bear this dictum in mind while filing their reports and stories. We should be wary of stories planted by police and by vested interests. Sensationalism is an easy trap to fall into but we must remember that we are dealing with the lives and reputations of people.    
Kazmi was arrested on March 6 by the Special Cell of Delhi Police on thecharge of helping Iranian agents to conduct a reconnaissance of the area around the Israeli embassy in his car. A motorcyclist, allegedly Iranian, had planted a bomb on a car of the Israeli embassy on February 13, causing injuries to the occupants including the wife of the Israeli Defence Attache. Police named four Iranians in the charge-sheet filed belatedly last month. The Iranians, the police say, fled India after the attack.Israel had blamed Iran for the attack but Tehran denied any involvement. The arrest of Kazmi came allegedly under foreign pressure on the government.The DUJ advises its members to exercise great caution and ensure unbiased and balanced reportage of such cases in the future.

Sujata Madhok                        S.K. Pande
President                                General Secretary 

Monday, October 22, 2012

शीला दीक्षित ने केजरीवाल को मानहानि का नोटिस भेजा

 दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने इंडिया अगेंस्ट करप्शन के सदस्य अरविंद केजरीवाल को मानहानि का नोटिस भेजा है। नोटिस में कहा गया है अरविंद ने शीला दीक्षित के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। वहीं अरविंद केजरीवाल ने इस नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शीला चाहे जितने नोटिस भेज लें, वे आगे भी उनके मान का हानि करता रहूंगा।शीला के नोटिस पर केजरीवाल ने कहा कि शीला जी आपकी मानहानि हम नहीं कर रहे आपके कुकर्म कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब हमारा संविधान लिखा गया था तभी हमें शांतिपूर्वक विरोध करने का अधिकार दिया गया था। 
उन्होंने कहा कि हमने 15 अक्टूबर को यह कहा था कि हम यहां शांतिपूर्वक विरोध करेंगे। तब हमें सारी इजाजत थी लेकिन कल हमारे पास फोन आता है कि हम स्टेज नहीं लगा सकते। टैंट नहीं लगा सकते और आज सुबह कहा गया कि माइक भी नहीं लगा सकते। फिर इसका क्या मतलब है? गौरतलब है कि पिछले दिनों केजरीवाल ने शीला दीक्षित को बिजली कंपनियों का दलाल कहा था। केजरीवाल ने इस मुद्दे पर माफी मांगने से इनकार कर दिया है। 

महिलाओं और बच्चों को मोबाइल नहीं देना चाहिए - बीएसपी सांसद राजपाल सैनी


 बीएसपी के सांसद राजपाल सैनी ने महिलाओं और बच्चों को मोबाइल नहीं देना चाहिए इन्हें मोबाइल की कोई जरूरत नहीं है मोबाइल से इनका ध्यान बंटेगा महिलाओं को मोबाइल फोन क्यों चाहिए? मेरी मां, पत्नी और बहन के पास आजतक कोई मोबाइल फोन नहीं है गौरतलब है कि खाप पंचायतें भी ऐसे अजीब फरमान जारी करती रहती हैं मोबाइल फोन को लेकर विवादित बयान दिया है जब सदस्य से पूछा गया कि हरियाणा में बलात्कार के मामले इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहे है तो सदस्य ने फिल्म और टीवी को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा दिया। सदस्य ने कहा कि मुझे लगता है कि युवाओं इन चीजों को देखकर ही इनसे प्रभावित होते है। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि लड़कियों को 16 साल की उम्र में शादी करा देनी चाहिए, ताकि उनके पति उनकी यौन जरूरतों को पूरा कर सकें और उन्हें कहीं और जाने की जरूरत ना पड़े। इस तरह बलात्कार नहीं होगा।
 गौरतलब है कि खाप पंचायतें भी ऐसे अजीब फरमान जारी करती रहती हैं।बीते दिनों बागपत में एक खाप पंचायत ने जुलाई 2012 में तालिबानी फैसला सुनाते हुए लव मैरिज पर रोक लगाने के साथ 40 साल से कम उम्र की महिलाओं के शॉपिंग करने से रोकने के साथ-साथ उनके मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी थी। अभी कुछ दिन पहले ही हरियाणा में एक खाप नेता ने हरियाणा में बलात्कार के बढ़ते मामलों के लिए चाउमिन को जिम्मेदार ठहराया था। खाप नेता जितेंद्र छत्तर ने युवाओं से चाउमिन से दूर रहने के लिए कहा था। छत्तर ने कहा कि चाउमिन और मोमो जैसे जंक फूड खाने से युवाओं का हार्मोनल असंतुलन बिगड़ जाता है और वो रेप कर बैठते है।इससे पहले हरियाणा में बलात्कार के मामलों की बढ़ती संख्या के लिए एक चौंकाने वाला प्रतिक्रिया में खाप पंचायत के सदस्यों ने बलात्कार के लिए लड़कियों को जिम्मेदार ठहराया था। एक खाप पंचायत सदस्य ने बलात्कार से छुटकारे का अजीबो-गरीब उपाय भी सुझाया था। सदस्य ने कहा कि लड़कियों की शादी 16 साल की उम्र में कर दी जाए।

झाबुआ कोतवाली का थाना प्रभारी तीन बच्चियों को बनाया


तीन बच्चियों को थाना प्रभारी बनाया गया है कि उन्होंने बकायदा अपना पदभार भी संभाल लिया है.शहीदों को नमन कर रही इन बच्चियों को झाबुआ कोतवाली का थाना प्रभारी नियुक्त किया गया है इनमें से  दो और बच्चियों को राणापुर और मेघनगर का थाने का प्रभारी बनाया गया है.अगर आप इसे मजाक समझ रहे हैं तो फिर आप हम आपको बताते हैं यह बिल्कुल सच और सही बात है.क्योंकि कि जिन बस फर्क सिर्फ इतना है कि इनका कार्यकाल केवल एक दिन का है.दरअसल इन्हें शहीद पखवाड़े के दौरान आयोजित चित्रकाल प्रतियोगिता का विजेता होने का इनाम मिला है. एक दिन के इन थाना प्रभारियों ने नियुक्ति मिलने के साथ ही अपना पदभार संभाल लिया.क्योंकि इन्हें भी पता था कि इनका कार्यकाल एक ही दिन का है और इनको अपने कार्यों को एक ही दिन में निपटाना है.ये बच्चियां भी पदभार संभालते हुए काफी उत्साहित नज़र आईं. भले ही इन तीन बच्चियों का कद और उम्र छोटी हो लेकिन इनके हौंसले काफी बड़े हैं.यही वजह है कि ये बड़े होकर भी आईपीएस अधिकारी ही बनना चाहती हैं. पुलिस की इस अनोखी पहल से इन बच्चियों के साथ-साथ आम लोगों को भी पुलिस को करीब से जानने का मौका मिला.

Wednesday, October 17, 2012

बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी के हित हैं की कीमत किसान चुका रहे हैं; अरविंद केजरीवाल


अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी पर खुलासा करते हुए बुधवार को सवाल उठाए हैं कि वो किसके हक में काम कर रहे हैं। वो किसके इंट्रेस्ट को रिप्रेजेंट करते हैं? महाराष्ट्र में 71 हजार करोड़ का सिचाई घोटाला सामने आया है। कांग्रेस-एनसीपी की मिलीजुली सरकार के दौरान बीजेपी ने किसानों के लिए कुछ नहीं किया। बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने भी मदद नहीं की।जिस वक्त अरविंद केजरीवाल गडकरी के बारे में खुलासा कर रहे थे तो उसी वक्त गडकरी के घर पर बीजेपी के बड़े नेता सुषमा स्वराज, विजय गोएल, बलबीर पुंज और प्रकाश जावड़ेकर मौजूद थे।
 गडकरी ने अंजली दमानिया को कहा कि शरद पवार से उनके अच्छे रिश्ते हैं। चार काम वो करते हैं तो चार काम वो उनका करते हैं।हालांकि बाद में मीडिया में गडकरी ने इससे इंकार किया था। मुंबई में आईएसी की सदस्य अंजली दमानिया और प्रीति ने सिंचाई घोटाले की जांच की। एक महीने की जांच में चौंकानेवाले तथ्य सामने आए हैं। अरविंद ने सवाल उठाया कि विदर्भ में किसान खुदकुशी क्यों कर रहे हैं? जब आईएसी की सदस्य एक महीने में जांच कर तथ्य सामने ला सकती हैं तो सरकारें क्या कर रहीं हैं? जांच एजेंसियां क्या कर रही हैं?अन्ना आंदोलन के दौरान अंजली दमानिया ने आरटीआई दाखिल की जिसके बाद उनको सबूत मिले की 70 हजार करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी किसानों को फायदा नहीं क्यों नहीं मिले? अरविंद ने खुलासा किया कि नागपुर के खुर्सापुर गांव में डैम बनाने के लिए जमीन अधिग्रहित की गई। इलाके के किसान गजानन रामभावजी घडगे की जमीन अधिग्रहित की गई। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जितनी जमीन चाहिए थी उससे ज्यादा जमीन अधिग्रहित की गई।लेकिन डैम बनाने के बाद भी जमीन खाली पड़ी थी जिसपर सिंचाई विभाग के आदेश से गजानन उसपर खेती कर रहे थे, इसके लिए उन्होंने सिंचाई विभाग से आज्ञा ले रखी थी। बांध बन गया। 100 एकड़ जमीन खाली पडी थी। सिंचाई विभाग के इंजीनियर ने 18 एकड़ जमीन पर खेती की प्रमीशन दी। इसके बाद साल 2000 में किसानों ने सूबे के शासन को चिट्ठी लिखी और मांग की कि फालतु खाली पड़ी जमीन पर वो खेती करना चाहते हैं। वो जमीन उनको लीज पर या बेच दी जाए। लेकिन सिंचाई विभाग का जवाब आया कि जमीन पर सिंचाई बंद कर दी जाए। इस खाली पड़ी जमीन पर सौंदर्यीकरण का काम करना है।4 जून 2005 को बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने अजित पवार को चिट्ठी लिखी की उनको 100 एकड़ जमीन चाहिए। अजित पवार ने चार दिन यानि 8 जून को वीआईडीसी को कहा कि गडकरी के प्रस्ताव को 22 जून की बैठक में पेश किया जाए। इस बैठक में नितिन गडकरी की मांग को मंजूरी दे दी गई। हालांकि इसका सिंचाई विभाग ने विरोध किया कि कानून के तहत ऐसा करना संभव नहीं है।28 नवंबर 2007 को एक और मीटिंग हुई और 100 एकड़ जमीन गड़करी को दे दी गई। 6 जून 2008 को घडगे ने लोकल एमएलए को लिखा कि ज्यादा अधिग्रहण होने पर बची हुई जमीन किसानों को वापस होनी चाहिए ऐसा कानून है। ये हमें वापस मिलनी चाहिए।21 जून 2008 को घड़गे को बुलाया गया ,वहां गड़करी की कंपनी के कुछ अधिकारी थे, घड़गे को कहा गया कि ये जमीन अब गड़करी की कंपनी को दे दी गई है। इसे आपको छोड़ना होगा। 28 जून 2008 को जब वो लौटा तो गड़करी की कंपनी के एमडी ने कहा कि जो कर सकते हो कर लो, अब ये जमीन हमारी है।उसी गांव में पंचायत ने प्रस्ताव पारित किया 19 अगस्त 2007 को प्रस्ताव पारित किया कि गड़करी की कंपनी का जो पावर प्लांट है, उसका गंध पीने के पानी में मिलता है। इसे बंद किया जाए।अरविंद ने खुलासा करते हुए कहा कि नितिन गडकरी का बड़ा एंपायर है। उनका इसमें व्यासायिक इंट्रेस्ट हैं। क्या वो महाराष्ट्र के विदर्भा के किसानों के विरोध में है? क्या महाराष्ट्र के अंदर व्यवसाय किसानों की खुदकुशी पर हो रहा है? केजरीवाल ने कहा कि वो एक प्रश्न देश के सामने रखना चाहते हैं कि क्या बीजेपी देश की विपक्षी पार्टी है या बीजेपी सत्ताधारी पार्टियों से मिली हुई है। सवाल उठाते हुए अरविंद ने खुलासा किया कि गडकरी साहब का इंटरेस्ट क्या है। उनके बिजनेस हित क्या महाराष्ट्र के किसानों के हितों से टकरा रहे हैं? महाराष्ट्र के अंदर जो गड़करी के हित हैं उनकी कीमत किसान चुका रहे हैं?