Tuesday, December 4, 2012

गन्ना किसानो को उनका हक़ मिलना चाहिए

किसान गन्ना क्षेत्र में रंगराजन कमेटी की ओर से की गई सिफारिशों का विरोध कर रहे हैं। घेराव का आयोजन करने वाले संगठन के मुताबिक उनकी ओर से इसे लेकर प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी भी लिखी गई थी जिसमें सरकार को विचार करने के लिए 30 नवंबर तक का अल्टीमेटम दिया गया था। उस दौरान 2 नवंबर को की गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीके सिंह ने किसानों का समर्थन किया था और उत्तर प्रदेश सरकार से गन्ने का लाभकारी मूल्य जल्द से जल्द घोषित करने की मांग करते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार ने गन्ने का लाभकारी दाम शीघ्र घोषित नहीं किया तो यहां के किसान भी महाराष्ट्र की राह पर चल पड़ेंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि यहां का किसान सरकार की तरफ आशा भरी निगांहोंं से देख रहा है। राज्य सरकार को भी किसानों के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। गौरतलब है कि हाल  में महाराष्ट्र में गन्ने का दाम बढाने की मांग को लेकर आन्दोलन कर रहे किसानों पर पुलिस फायङ्क्षरग में एक किसान की मौत हो गयी थी और कई अन्य घायल हो गये थे। उन्होंने कहा कि किसानों का गन्ना खेत में खडा है और अधिकांश चीनी मिलें अभी गन्ने की खरीद ही नहीं शुरु कर सकी हैं। उन्होंने कहा कि अधिक समय तक गन्ने के खेत में खडा रहने से उससे चीनी की रिकवरी कम हो जाती है इसलिए इसकी तुरन्त खरीद शुरु करायी जाय.
सांसद जयाप्रदा ने कहा कि वह गन्ना किसानों की समस्याएं गांव से लेकर संसद तक उठायेंगी। वह बिलासपुर और मिलक क्षेत्र के गांवों में भ्रमण कर रही थी। गन्ने की वाजिब कीमतों की मांग कर रहे आंदोलनरत किसानों ने अब राज्य सरकार के साथ ही कृषि मंत्री शरद पवार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।उन्होंने पवार के  उस बयान की तीखी आलोचना की है, जिसमें उन्होंने आंदोलन को जातिवादी करार दिया था। शेतकरी संगठन के तीन प्रमुख धड़ों ने पवार के इस रवैए की आलोचना करते हुए आंदोलन को और तेज करने का एलान किया .सांगली, सतारा और कोल्हापुर जिलों में सहकारी चीनी मिलों के इस मौसम में गन्ना खरीदने पर प्रति टन 3000 रुपए अग्रिम देने से इनकार करने पर किसान पिछले कई दिन से प्रदर्शन कर रहे हैं। मिलें प्रति टन 2300 रुपए देने को तैयार हैं। जबकि किसान गन्ने की फसल के लिए अग्रिम भुगतान किए जाने की मांग कर रहे हैं। जबकि खाद, बिजली और पानी की बढ़ी कीमतों के मद्देनजर गन्ना उत्पादन लागत बढ़ गयी है इसलिए महाराष्ट्र सरकार शीघ्र ही गन्ने का लाभकारी मूल्य घोषित करे और आन्दोलन में मारे गये किसानों के  परिजनों को दस-दस लाख तथा घायलों को दो-दो लाख रूपये मुआवजा दिया जाये। उन्होंने कहा कि रालोद महाराष्ट्र के किसानों के  साथ है। 

Thursday, November 22, 2012

ग्रामीण साप्ताहिक बाजारों का अपना एक महत्त्व है।

सिकुड़ते गाँव और बढ़ते शहरीकरण के बावजूद इस समय भी  देश की 70 प्रतिशत जनसंख्या गावों में बसती  है आज भी हमारे गाँव हमारी संस्कृति हमारी परम्परा और जीवत जीवन की बचाए  हुये हैं  गावों का रहन - सहन , संस्कृति आज भी हमें आकर्षित करती हैं . ग्रामीण  जीवन का सबसे बड़ा आकर्षण गावं के मेला और बाजार हैं जो आज भी देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं . गावं का मेला या  ग्रामीण साप्ताहिक बाजारों का अपना एक महत्त्व है। देश के एक अरब उपभोक्ताओं में से दो - तिहाई इन्हीं बाजारों से अपनी दैनिक उपयोग की वस्तुओं को खरीदते हैं। देश के आन्तरिक व्यापार का बडा हिस्सा इन्हीं बाजारों में होता है। सकल राष्ट्रीय आय में आधी हिस्सेदारी ग्रामीण है। सरकारी आंकडों के अनुसार वर्ष 2008-09 में देश के ग्रामीण बाजारों से लगभग 20 हजार अरब रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। इस राजस्व में प्रतिवर्ष वृद्धि हो रही है, जिसका मुख्य कारण ग्रामीण विकास के लिए सरकारी बजट में वृद्धि होना बताया जाता है। भारत में ग्रामीण बाजार दो तरह के हैं। एक वे हैं जहां पर स्थायी दूकानें बनी होती हैं, तथा पूरे दिन व्यावसायिक गतिविधियां चलती रहती हैं। दूसरे वे हैं जहां सप्ताह में एक या दो दिन अस्थायी दूकाने लगती हैं। इन बाजारों को हाट भी कहा जाता है। इनमें दुकानदार के रूप में कृषक, शिल्पकार, लघुउद्यमी और स्थानीय गावों के दुकानदार होते हैं। यहां पर दैनिक उपयोग की वस्तुओं, कृषि उपकरणों, अनाज, कृषि-उत्पादनों की बिक्री व खरीदारी की जाती है। खरीदार भी आसपास के ग्रामीण ही होते हैं। सरल शब्दों में कहा जाये तो ग्रामीण साप्ताहिक बाजार एक तरह से खुदरा बाजार हैं। जिनमें स्थानीय उत्पादों की, स्थानीय दुकानदारों द्वारा बिक्री और स्थानीय उपभोक्ताओंद्वारा खरीदारी की जाती है।
ये साप्ताहिक बाजार सदियों से भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ बने हुए हैं।भारत के ग्रामीण बाजारों में दैनिक उपयोग में आनेवाली वस्तुओं की बिक्री 20 प्रतिशत की रफ्तार से बढ रही है। इसलिए छोटी-बडी कम्पनियां उन तक पहुंचने के लिए नये-नये उपाय कर रही हैं। साबुन, दंतमंजन, तेल, सैम्पू, सौन्दर्य प्रसाधन बनानेवाली कम्पनियों के साथ ही टी.वी., रेफ्रिजरेटर, मोबाइल फोन बनाने वाली और बिस्कुट, चाकलेट, पेय पदार्थ, चिप्स इत्यादि खाद्य पदार्थ बनानेवाली कम्पनियाँ ग्रामीण बाजारों में अच्छा व्यवसाय कर रही हैं। इस समय देश में रोजमर्रा की वस्तुओं की कुल खपत का 40 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण भागों में हो रही है। अनुमान है कि आगामी 3-4 वर्षों में यह खपत बढकर 55 से 60 प्रतिशत हो जायेगी। धन की उपलब्धता के चलते अब सस्ती ही नहीं, बल्कि महंगी वस्तुओं की खपत भी बढने लगी है। जो वस्तुएं शहरी दूकानों में मिलती हैं, उनमें से अधिकांश ग्रामीण बाजारों की स्थायी दूकानों में भी उपलब्ध होने लगी हैं।भारत में ग्रामीण बाजार आज भी स्थानीय दूकानों और खरीदारों पर निर्भर है। स्थानीय पूंजी द्वारा ही इनका ढांचा खडा किया जाता है। इनके विकास में शहरी और बाहरी पूंजी का नितांत अभाव है। बैंक और अन्य वित्तीय व्यवस्थायें भी अधिक रुचि नहीं ले रही हैं। ग्रामीण बैंक पूंजी के अभाव में अधिक कारगर सिद्ध नहीं हो रहे हैं। रिजर्व बैंक की एक रपट के अनुसार ग्रामीण भाग के 40 प्रतिशत लोगों तक कोई भी औपचारिक वित्तीय सेवा नहीं पहुंच पायी है। ग्रामीण बैंको का अपर्याप्त पूंजी बाजार तथा कर्मचारियों की प्रोन्नति के अवसरों में कमी इन बैंकों को अप्रभावी बना दिया है। फलत: ऋण वसूली भी बेहतर ढंग से नहीं हो पा रही है। ग्रामीण खरीदारों को किसी भी संस्था द्वारा कर्ज उपलब्ध नहीं कराया जाता। आज भी ग्रामीण जनता बहुत सोच समझकर खर्च करती है। उनकी इस आदत में बदलाव लाने के प्रयास किये जा रहे हैं। यदि बडि कम्पनियां अपने उत्पादों को ग्रामीण भागों में खपाना चाहती हैं तो वहां के उपभोक्ताओंको धन सहज सुलभ हो, इसके लिए उपाय करने होंगे।

भारत का ग्रामीण उपभोक्ता अपने भविष्य के प्रति सचेत रहता है। इसलिए अपनी बचत के पैसे से वह जमीन जायदाद या फिर सोना खरीदता है। उपभोग की वस्तुओं के प्रति वह बहुत सावधान रहता है। बडी कम्पनियां उन्हेें कम गुणवत्तावाली वस्तुओं को बेचकर अधिक दिनों तक बाजार में टिकी नहीं रह सकतीं। इसलिए उन्हें अपनी बिक्री बढाने के लिए गुणवत्ता बढाने के साथ-साथ विपणन और वितरण (मार्केटिंग एण्ड डिस्ट्रीब्यूशन) के तरीके बदलने की जरूरत है। तेजी से बढते ग्रामीण बाजारों की सुरक्षा के लिए सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए। ग्रामीण उपभोक्ताओं का शोषण न हो सके और उन्हें अच्छी उपयोगी वस्तुएं सही मूल्य पर मिल सकें इसके लिए कानून बनाने होंगे। वस्तुओं के मूल्य और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए "ग्रामीण बाजार नियामक आयोग" जैसी किसी संस्था का गठन करना होगा। इन बाजारों में स्थानीय उत्पाद, कुटीर उद्योगों की वस्तुएं, स्थानीय शिल्पकारों द्वारा निर्मित वस्तुएं, कृषि उत्पन्न इत्यादि मिलते रहें और बडी कम्पनियों द्वारा उन्हें नुकसान न पहुंचाया जाये इसके लिए भी कदम उठाने होंगे।
ग्रामीण बाजार देश की अर्थव्यवस्था का भविष्य हैं। उन्हें प्रोत्साहित करने, उन्हें संरक्षण प्रदान करने, उनकी गति बनाये रखने और उपभोक्ताओं का हित सुरक्षित करने के लिए उचित उपाय करने होंगे। यदि ऐसा न हुआ तो बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का बढता संजाल शहरों की तरह ग्रामीण
           

भारत के बाजारों में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की घुसपैठ के कारण साप्ताहिक ग्रामीण बाजारों का स्वरूप भी प्रभावित हुआ है। स्थायी दूकानों में परम्परागत उपभोग की वस्तुओं की जगह देशी-विदेशी कम्पनियों के उत्पाद सजे मिलते हैं। आवश्यक आवश्यकता की वस्तुओं की जगह सुखकर आवश्यकता की वस्तुओं ने ले ली है। इन वस्तुओं की सहज उपलब्धता से ग्रामीणों में मांग भी बढने लगी है। सरकार की ग्रामीण विकास की योजनाओं - भारत निर्माण योजना, राष्ट्रीय रोजगार गारन्टी योजना के बजट में भारी वृद्धि किये जाने से ग्रामीण मजदूरों को प्रत्यक्ष पूंजी मिलने लगी है। इसके अलावा किसान कर्ज माफी योजना तथा किसान कर्ज राहत योजना में दिया गया धन भी ग्रामीणों के पास पहुंच रहा है। ग्रामीण सडकों के निर्माण, ग्रामीण आवास व शौचालय के लिए आबंटित सरकारी धन से ग्रामीण बाजार को गति मिल रही है। सरकार ग्रामीण भागों में उपभोक्ता की वस्तुओं की मांग बढाने पर ध्यान केन्द्रित कर रही है। बहुराष्ट्रीय कम्पनियां भी अपने उत्पादों के साथ मध्यमवर्गीय ग्रामीणों तक पहुंचने की पुरजोर कोशिश कर रही हैं। परिणामस्वरूप देश के गावों में मध्यवर्ग का दायरा बढ रहा है। गावों में मध्यवर्ग से उच्चवर्ग के घरों की संख्या कुल आबादी का 17 प्रतिशत हो गया है। भौतिक तथा सामाजिक आधारभूत ढांचे में आये सुधार, बैंकों के बढते संजाल, परिवहन के साधन तथा संचार व्यवस्था में विस्तार से ग्रामीण बाजारों को लाभ पहुंचा है। वहां रोजगार के प्रत्यक्ष अवसर में वृद्धि हुई है। मंदी के दौर में भारत के ग्रामीण बाजार से कम्पनियों को राहत मिली है। मार्केटिंग कम्पनियों के लिए शहरी उपभोक्ताओं तक पहुंचना, उन्हें रिझाना तथा उनकी पसंद का अनुमान लगाना आसान होता है, किन्तु बने-बनाये सिद्धान्त के आधार पर भारत के ग्रामीण बाजारों के प्रति कोई राय कायम करना मुस्किल काम है। ग्रामीण बाजार काफी विस्तृत भाग में छोटे छोटे टुकडों में बंटे हुए होते हैं। इसलिए ग्रामीणों तक उत्पादों की जानकारी पहुंचाना बहुत कठिन होता है। अखबार, पत्रिका, टी.वी. और रेडियो जैसे पारम्परिक संचार माध्यमों द्वारा भी केवल 50 प्रतिशत ग्रामीणों तक ही सम्पर्क हो पाता है। इन विशेषताओं के कारण बडी कम्पनियाों द्वारा ग्रामीणों की आदतों, पसन्द-नापसंद, उनकी जीवनशैली, रहन - सहन का सूक्ष्म अध्ययन कराया जा रहा है। प्रचार के लिए विज्ञापनों और बडे-बडे होर्डिंग्स के बजाय मुंहजबानी प्रचार पद्धति का सहारा लिया जा रहा है। ग्रामीण बाजारों में पुराने जमाने की तरह गवैयों और विदूषकों द्वारा प्रचार पर भी विचार-विमर्श चल रहा है। इस कार्य में बडी कम्पनियों की मदद गावों में स्थित गैर सरकारी संगठन भी कर रहे हैं। अपने उत्पादों को चर्चित और लोकप्रिय बनाने के लिए ग्रामीण विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियां भी बडी कम्पनियों द्वारा दी जा रही हैं।
            
           

संसद कलतक के लिए स्थगित

जैसा कि  उम्मीद थी संसद की शुरुआत हंगामे से होगी और संसद कलतक  के लिए स्थगित कर दी गयी  विपक्ष के जोरदार हंगामे के साथ संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत हुई. वहीं लोकसभा की कार्यवाही 12:30 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है.राज्यसभा की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी गई है. इस बीच सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा है कि हमारी नीति साफ है कि संसद चलनी चाहिए बीएसपी ने एससी-एसटी आरक्षण विधेयक को लेकर हंगामा शुरू किया तो टीएमसी और बीजेपी ने एफडीआई को लेकर. संसद की कार्यवाही शुरू होते ही तृणमूल कांग्रेस नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया. साथ ही लोकसभा में प्रतिपक्ष की नेता और वरिष्ठ बीजेपी नेता सुषमा स्वराज ने लोकसभा में स्पीकर को एफडीआई पर चर्चा और वोटिंग के लिए नोटिस दिया. संसद का सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एफडीआई के मुद्दे पर सभी पार्टियों से सरकार का साथ देने की अपील की. उन्होंने कहा कि देश को निवेश की जरूरत है. सरकार हरेक मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है.' इसके जवाब में बीजेपी नेता बलबीर पुंज ने कहा कि पीएम के इस बयान का कोई मतलब नहीं है.

Saturday, November 17, 2012

पॉन्टी चड्ढा , भाई हरदीप चड्ढा की मौत

उद्योगपति पॉन्टी चड्ढा के राजधानी दिल्‍ली स्थित छतरपुर फार्म हाउस में गोलीबारी की खबर है.  खबर के अनुसार फार्म हाउस में हुए झगडे के दौरान गोली चली हैं. इस घटना में पॉन्टी चड्ढा के भाई हरदीप चड्ढा की मौत हो गई है. यह फार्म हाउस करीब 13 एकड़ में फैला हुआ है. सूचना मिलने पर दिल्‍ली पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंच गई है और जांच में जुट गई है. पॉन्टी चड्ढा के यूपी की राजनीति में खासी धमक रखते हैं. वो ना सिर्फ शराब के बड़े कारोबारी हैं, बल्कि रियल इस्टेट में भी उनका दबदबा है और कई मॉल्स और मल्टीप्लेक्स के वे मालिक हैं. फिल्मों में भी पॉन्टी ने पैसा लगाया है.इससे पहले 5 अक्टूबर को भी पॉन्टी चड्ढा के मुरादाबाद स्थित पुश्तैनी बंगले पर फायरिंग हुई थी लेकिन उस समय इस मामले को दबा दिया गया था. उस दिन पांच फायर हुए थे और पुलिस ने ये कहकर मामला रफा-दफा कर दिया था कि पॉन्टी के भतीजे ने नई रिवाल्वर खरीदी थी जिससे टेस्टिंग करते समय फायर हो गए.बताया जा रहा है जिस दिन मुरादाबाद के बंगले में फायरिंग हुई थी उससे दो दिन पहले ही इन भाइयों में बंटवारा हुआ था लेकिन न तो पॉन्टी और न ही उसके भाई मीडिया को कुछ बताने को तैयार थे.

Thursday, November 8, 2012

संघ के समर्थन से नितिन गडकरी की कुर्सी बची


संघ के समर्थन से बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी की कुर्सी तो बच गई, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे गडकरी को दूसरा कार्यकाल दिए जाने को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता एकमत नहीं हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों पर पार्टी की क्लीनचिट मिलने के अगले दिन यानी बुधवार को भी बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने वरिष्ठ नेताओं से अपनी मुलाकात का सिलसिला जारी रखा। गडकरी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज के अलावा पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह से भी मुलाकात की। माना जा रहा है कि मौजूदा कार्यकाल के लिए पार्टी से अभयदान मिलने के बाद गडकरी अब दूसरे कार्यकाल के लिए वरिष्ठ नेताओं को मना रहे हैं। लेकिन गडकरी को दूसरा गडकरी को दूसरे कार्यकाल को लेकर सुषमा का विरोध खत्म हो गया है। सुषमा को लगता है कि ऐसा करने से संघ उन्हें भविष्य की राजनीति में मदद करेगा। राजनाथ सिंह भी गडकरी के समर्थन में खड़े दिखाई दे रहे हैं। संघ ने ही राजनाथ को पार्टी अध्यक्ष बनवाया था। संघ से बीजेपी में आए संगठन महासचिव रामलाल भी गडकरी को दूसरा कार्यकाल दिलाने के लिए पेशबंदी कर रहे हैं।कार्यकाल दिए जाने पर पार्टी नेताओं की राय बंटी हुई हैं। पार्टी की ओर से इस पर खुलकर कुछ भी नही कहा जा रहा है।बीजेपी महासचिव जे पी नड्डा के मुताबिक दूसरे कार्यकाल पर पार्टी नेता सही समय पर उचित निर्णय लेगें। संघ के दबाव में पार्टी ने गडकरी को दूसरा कार्यकाल दिलाने के मकसद से ही अपने संविधान में संशोधन किया था। सूत्रों के मुताबिक संघ पूरी तरह चाहता है कि गडकरी को दूसरा कार्यकाल मिले। संघ पृष्ठभूमि के नेता गडकरी के समर्थन में लामबंदी कर रहें हैं। इसका असर भी दिखने लगा है।
लेकिन गडकरी के दूसरे कार्यकाल का विरोध करने वालों की फैहरिस्त भी लंबी है। आडवाणी गडकरी को दूसरा कार्यकाल देने के खिलाफ अपनी राय संघ को बता चुके हैं। आडवाणी का तर्क है कि गडकरी को साथ लेकर चलने से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कमजोर होगी और 2014 में खामियाजा उठाना पड़ेगा। अरुण जेटली ने संघ के दबाव में फिलहाल समर्थन का ऐलान किया है लेकिन वो दूसरे कार्यकाल के विरोध में हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी फिलहाल चुप हैं लेकिन वो भी गडकरी से ज्यादा खुश नहीं बताए जाते। कहा तो यहां तक जा रहा है कि मोदी गुजरात में प्रचार करने से गडकरी को रोक भी सकते हैं।
यही नहीं, यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह जैसे नेता भी गडकरी के खिलाफ खड़े हैं। रामजेठमलानी भले ही हाशिए पर हैं, लेकिन गडकरी के खिलाफ मोर्चा खोलकर उन्होने विरोधियों की भावना को ही आवाज दी है। रामजेठमलानी के मुताबिक जो भी फैसला बीजेपी नें किया है उससे उनकी करप्शन के खिलाफ लडाई कमजोर ही होगी। अब संघ को ये तय करना है कि ग़डकरी विरोधियों की बात मानें और अपनी पसंद के किसी दूसरे नेता को कमान दे या तमाम विरोधों के बावजूद अपनी ताकत का इस्तेमाल गडकरी को दूसरा कार्यकाल दिलाए।

Tuesday, November 6, 2012

स्वामी की याचिका चुनाव आयोग ने खारिज की


 कांग्रेस पार्टी की मान्यता खत्म करने की जनता पार्टी अध्यक्ष सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है। स्वामी ने दावा किया था कि हेराल्ड ट्रिब्यून को कांग्रेस ने ब्याज रहित 90 करोड़ का लोन दिया था इसलिए कांग्रेस की मान्यता खत्म की जानी चाहिए। चुनाव आयोग ने स्वामी की ये याचिका खारिज कर दी।उन्होंने कहा कि मुझे पहले से ही इस बात का अंदेशा था लेकिन प्रक्रिया यही है कि पहले आयोग का दरवाजा खटखटाया जाए उसके बाद कोर्ट का रुख किया जाए इसीलिए मैंने पहले आयोग के समक्ष याचिका दी थी।
आयोग के फैसले पर सुब्रमण्यम स्वामी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। स्वामी ने कहा कि चुनाव आयोग बहुत ही लचीली संस्था है। उसे कांग्रेस ने हमेशा अनदेखा किया है। मैं अब कोर्ट जाऊंगा। स्वामी ने कहा कि उनकी याचिका खारिज करने से पहले आयोग को कम से कम सुनवाई तो करनी चाहिए थी लेकिन उसने वो भी नहीं किया।

नितिन गडकरी के इस्तीफे पर बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक

नितिन गडकरी के इस्तीफे को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आज शाम बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक हो रही है। बैठक में पार्टी गडकरी के साथ खड़े होने की बात करेगी। उधर, सुषमा स्वराज ने ट्विटर पर लिखा है कि गडकरी का साथ न देने की खबर गलत है। मैं हमेशा गडकरी के साथ हूं।इससे पहले नितिन गडकरी पर पार्टी के अंदर से ही हमले तेज हो गए हैं। पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजेठमलानी ने गडकरी पर तीखा हमला बोलते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर दी।
राम जेठमलानी ने कहा कि गडकरी पर लगे वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों के चलते पहले ही पार्टी को काफी नुकसान हो चुका है। उनका यह भी दावा है कि पार्टी में कई और नेता गडकरी के इस्तीफे के पक्ष में हैं। उन्होंने यशवंत सिन्हा और जसवंत सिंह का नाम लेते हुए कहा कि वह भी गडकरी के इस्तीफे की मांग पर सहमत हैं। इसे लेकर जेठमलानी ने तीनों के नाम पर एलके आडवाणी को एक चिट्ठी भी लिखी है।गडकरी को अध्यक्ष पद से हटाने की इस मुहिम के बीच अध्यक्ष पद के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का नाम भी कुछ लोग उछाल रहे हैं, लेकिन गुजरात बीजेपी के सूत्रों से जानकारी मिली है कि मोदी कम से कम गुजरात चुनावों तक अध्यक्ष बनने को तैयार नहीं हैं।सूत्रों का कहना है कि मोदी दिल्ली में पार्टी के भीतर जारी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। साथ ही मोदी नहीं चाहेंगे कि यशवंत सिन्हा या जसवंत सिंह जैसे नेता अध्यक्ष की कुर्सी संभालें। 
सूत्रों के मुताबिक, वह अरुण जेटली जैसे भरोसेमंद साथी ही इस पद के लिए चाहेंगे।दूसरी तरफ बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने विवेकानंद और दाऊद इब्राहिम के आईक्यू पर दिए अपने बयान पर खेद जताया है। गडकरी ने एक बयान जारी कर कहा है कि स्वामी विवेकानंद हमेशा से बीजेपी के लिए प्रेरणास्रोत रहे हैं। मेरे दिल में भी उनके लिए इज्जत रही है।गडकरी ने कहा कि मैंने कहा था कि स्वामी विवेकानंद ने अपनी पूरी जिंदगी मानवता के कल्याण में लगा दी। मुझे इस बात से दुख पहुंचा है कि मेरे बयान को गलत तरीके से समझा गया। मैं यह दोहराना चाहता हूं कि मैंने स्वामी विवेकानंद की तुलना किसी से नहीं की। फिर भी किसी को मेरे बयान से दुख पहुंचा है तो इसके लिए मैं खेद जताता हूं।
बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी पर पद छोड़ने के बढ़ते दबाव के बीच पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज उनके समर्थन में उतर आयी हैं। सुषमा ने मंगलवार को सोशल मीडिया साइट टिवटर पर लिखा है कि मीडिया में आ रही यह खबर पूरी तरह गलत है कि वह गडकरी का समर्थन नहीं कर रही है। स्वराज ने अपने ट्वीट में कहा कि मैंने हमेशा उनका समर्थन किया है और मैं अपना समर्थन दोहरा रही हूं। भाजपा के चार बड़े नेताओं ने खुलकर गडकरी को अध्यक्ष पद से हटाने की हिमायत की है.इसके बाद ये सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या नितिन गडकरी को दरवाज़ा दिखा दिया जाएगा?
जेठमलानी ने विवेकानंद और दाउद इब्राहिम के आईक्यू की तुलना के गडकरी के बयान की भी खिंचाई करते हुए इसे मूखर्ता से भरा बयान बताया। सोमवार को ही राम जेठमलानी के बेटे महेश जेठमलानी ने गडकरी के विरोध में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी से इस्तीफा दे दिया था।  मंगलवार को ही बीजेपी के कई नेताओं की आपस में मुलाकात हुई। गडकरी ने भी सुषमा स्‍वराज और अरुण जेटली से मुलाकात की। दूसरी तरफ आरएसएस के विचारक एस. गुरुमूर्ति ने लालकृष्‍ण आडवाणी से मुलाकात की। इसी मुद्दे को लेकर बीजेपी कोर ग्रुप की मंगलवार को सात बजे शाम बैठक होने की संभावना है।